जोन-C बिल्डिंग ब्रांच की जांच में खुलते जा रहे पन्ने!
कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एरिया में निर्माणों को लेकर उठे गंभीर सवाल—सरकारी राजस्व और बिल्डिंग बायलॉज पर अधिकारियों की नजर
लुधियाना | 23 सितंबर 2026 / विक्की कुमार
नगर निगम लुधियाना की जोन-C बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एरिया में हुए विभिन्न निर्माणों को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद अब मामला केवल कागजी जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उच्च अधिकारियों की नजर भी इस पूरे प्रकरण पर पड़ती दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार, शिकायतों के बाद बिल्डिंग ब्रांच से जुड़े मामलों की दोबारा जांच और मौके पर निरीक्षण किए गए। इस दौरान कुछ ऐसे निर्माण सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें स्वीकृत नियमों, बिल्डिंग बायलॉज तथा नगर निगम के राजस्व से जुड़े पहलुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।
शिकायतों के बाद अधिकारी खुद मैदान में उतरे
सूत्रों का दावा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित PCS अधिकारी स्तर पर भी जांच-पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान सामने आए मामलों ने बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि किसी निर्माण में निर्धारित फीस, कंपाउंडिंग शुल्क अथवा अन्य सरकारी राजस्व की वसूली नहीं हुई है, तो इससे सरकारी खजाने को संभावित नुकसान का आकलन करना भी जरूरी होगा।
जिम्मेदारी तय होगी या मामला फिर फाइलों में दबेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदारी किस अधिकारी और कर्मचारी की तय होगी? शिकायतों के बावजूद यदि किसी कर्मचारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हों और फिर भी उसे उसी शाखा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती रही हो, तो यह भी जांच का विषय बनता है कि विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई के लिए सरकार को रिपोर्ट भेजने की तैयारी की जा रही है। यदि यह रिपोर्ट भेजी जाती है तो आने वाले दिनों में इस मामले का दायरा नगर निगम से आगे बढ़कर उच्च सरकारी स्तर तक पहुंच सकता है।
कमिश्नर के सामने अब असली परीक्षा
पूरे मामले में नगर निगम कमिश्नर की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन अथवा सरकारी राजस्व को नुकसान की पुष्टि होती है, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि संबंधित कर्मचारियों को पब्लिक डीलिंग और संवेदनशील पदों पर बनाए रखना उचित है या नहीं।
जीत समाचार का सवाल सीधा है—
अगर जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कब होगी?
सरकारी राजस्व के नुकसान का हिसाब कौन देगा?
और क्या जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों को उसी जिम्मेदारी पर रखा जाएगा?
अब नजर नगर निगम कमिश्नर की अगली कार्रवाई पर है। दूध का दूध और पानी का पानी—जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

