जीत समाचार | लुधियाना अवैध कॉलोनियों पर नगर निगम की नजर, करोड़ों के पेंडिंग रेवेन्यू की होगी रिकवरी
रेगुलराइजेशन के लिए आवेदन के बाद फीस जमा न करवाने वाली कॉलोनियों के रिकॉर्ड की होगी स्क्रूटनी
लुधियाना, 27 सितंबर:कुमार
महानगर में अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनियों के साथ-साथ ऐसी कॉलोनियों का रिकॉर्ड भी नगर निगम के रडार पर आ गया है, जिन्होंने रेगुलराइजेशन के लिए आवेदन तो किया, लेकिन लंबे समय से निर्धारित फीस जमा नहीं करवाई।
नगर निगम कमिश्नर ओजस्वी द्वारा पेंडिंग रेवेन्यू की रिकवरी को लेकर चलाई जा रही मुहिम के दौरान यह मामला सामने आया है। इसके बाद बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नगर निगम के चारों जोनों में ऐसी कॉलोनियों का रिकॉर्ड खंगाला जाए और यह पता लगाया जाए कि किन कॉलोनियों ने रेगुलर करवाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन वर्षों बाद भी फीस जमा नहीं करवाई।
करोड़ों में बताया जा रहा पेंडिंग रेवेन्यू
नगर निगम के स्तर पर सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार इस श्रेणी की कॉलोनियों से संबंधित पेंडिंग रेवेन्यू करोड़ों रुपये में बताया जा रहा है। संबंधित कॉलोनियों के मालिकों को नोटिस जारी कर बकाया फीस जमा करवाने का अवसर देने की तैयारी है।
यदि नोटिस के बावजूद फीस जमा नहीं करवाई जाती तो नियमों के तहत रजिस्ट्री पर रोक, पानी-सीवरेज एवं बिजली कनेक्शन से संबंधित कार्रवाई तथा नक्शे पास करने पर रोक जैसे कदम उठाने पर विचार किया जा सकता है।
28 साल से अटके चालान, 45 करोड़ से ज्यादा की राशि!
बिल्डिंग ब्रांच से जुड़े पेंडिंग रेवेन्यू का मामला केवल कॉलोनियों तक सीमित नहीं है। नगर निगम द्वारा आरटीआई के तहत उपलब्ध करवाई गई जानकारी के अनुसार वर्ष 1997-99 से लेकर अब तक अवैध निर्माण के आरोप में जारी किए गए चालानों की बड़ी राशि अभी तक जमा नहीं हुई।
रिकॉर्ड के मुताबिक इन पेंडिंग चालानों से संबंधित जुर्माने की राशि 45 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस राशि की वसूली को लेकर अब बिल्डिंग ब्रांच में चालानों की दोबारा असेसमेंट और रिकॉर्ड की जांच के साथ रिकवरी के टारगेट तय करने की कवायद शुरू की गई है।
अधिकारियों की होगी नियमित मॉनिटरिंग
कमिश्नर की ओर से बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को पेंडिंग चालानों और रेवेन्यू की रिकवरी पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से प्रोग्रेस रिपोर्ट भी ली जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितनी राशि की रिकवरी हुई और कितने मामले अभी लंबित हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सालों से लंबित करोड़ों रुपये की यह राशि नगर निगम के खजाने में कब तक वापस आती है और पेंडिंग मामलों में आगे क्या कार्रवाई होती है।

