जोन-C बिल्डिंग ब्रांच का ‘खेल’ फिर सुर्खियों में! गरीब की ईंट पर पीला पंजा, चारदीवारी वाले मामले में मेहरबानी पर उठे सवाल

0

बिल्डिंग इंस्पेक्टर के बाद अब एटीपी जोन-C की भूमिका पर भी सवाल—‘नियम सबके लिए बराबर हैं तो कार्रवाई का पैमाना अलग क्यों?’

लुधियाना, 3 अक्तूबर:विक्की कुमार 

लुधियाना नगर निगम की जोन-C बिल्डिंग ब्रांच को लेकर ‘जीत समाचार’ द्वारा उठाए जा रहे सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब मामला ऐसा है कि यदि सामने आ रहे दस्तावेजों और मौके की स्थिति को एक साथ देखा जाए तो बिल्डिंग ब्रांच के कामकाज पर सवालों की एक पूरी किताब तैयार होती नजर आ रही है।एक तरफ छोटे दुकानदार या गरीब व्यक्ति की कुछ ईंटें लगते ही कार्रवाई के लिए जेसीबी पहुंचने की बातें सामने आती हैं, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसे मामले को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं जिसमें चारदीवारी करवाने संबंधी पत्र दिए जाने के बावजूद काम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।

गरीब के लिए कानून सख्त, दूसरे के लिए रास्ता आसान?’

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बिना मंजूर नक्शे के निर्माण नियमों के खिलाफ है तो फिर कार्रवाई का पैमाना हर व्यक्ति के लिए एक जैसा क्यों नहीं? बिल्डिंग ब्रांच में पहले बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर सवाल उठे। अब उसी मामले में एटीपी की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है। सवाल यह नहीं कि कार्रवाई किस पर हुई—सवाल यह है कि किस आधार पर हुई और किन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई?

चारदीवारी वाले मामले ने बढ़ाई हलचल

सूत्रों के अनुसार संबंधित बिल्डिंग मालिक की ओर से चारदीवारी करवाने संबंधी लिखित पत्र दिया गया था। अब इसी दस्तावेज को लेकर ‘जीत समाचार’ आने वाले दिनों में बड़ा खुलासा करने की तैयारी में है।यदि दस्तावेज में निर्माण को लेकर स्पष्ट अनुमति अथवा विभागीय प्रक्रिया का उल्लेख है, तो उसका आधार क्या था? और यदि अनुमति नहीं थी, तो फिर काम को लेकर विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई—इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।

‘जोन-C की किताब’ में अब नया अध्याय!

‘जीत समाचार’ पहले भी जोन-C बिल्डिंग ब्रांच से जुड़े मामलों को सामने लाता रहा है। अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि ‘जोन-C बिल्डिंग ब्रांच की कहानी’ पर एक पूरी किताब लिखी जा सकती है, जिसमें बिल्डिंग इंस्पेक्टर से लेकर एटीपी स्तर तक की कार्रवाई, नोटिस, चालान, शिकायतें और निर्माणों की स्थिति को दस्तावेजों के साथ दर्ज किया जाए।

सरकार का राजस्व या नियमों की अनदेखी?

नगर निगम पहले ही आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में यदि बिना आवश्यक मंजूरी अथवा नियमों की अनदेखी कर निर्माण होते हैं और उन पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो इससे नगर निगम के संभावित राजस्व पर असर पड़ने का सवाल उठता है।जीत समाचार’ के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ सूत्रों का दावा है कि संबंधित मामले में  काम आगे बढ़ने को लेकर विभागीय स्तर पर सहयोग किया जा रहा है।

एटीपी जोन-C का बयान: “काम रुकवा देता हूं” — लेकिन इसके बाद कार्रवाई का इंतजार

जोन-C एटीपी  से ‘जीत समाचार’ की बातचीत के दौरान जब संबंधित निर्माण के बारे में जानकारी दी गई, तो एटीपी  जोन-C  ने कहा कि वह मौके पर काम रुकवा देंगे। इसके बाद ‘जीत समाचार’ की ओर से निर्माण स्थल की तस्वीरें भी एटीपी  जोन-C  के WhatsApp पर भेजी गईं। तस्वीरें और जानकारी मिलने के बावजूद जब मौके पर काम जारी रहने की स्थिति सामने आई, तो एटीपी  जोन-C  से दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया। बाद में फोन और संदेश का जवाब नहीं मिला।अब सवाल यह है कि जब एटीपी  जोन-C  को निर्माण की जानकारी दे दी गई थी और उनके द्वारा खुद काम रुकवाने की बात कही गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभागीय स्तर पर इस मामले की जांच की गई और यदि की गई तो उसका परिणाम क्या रहा? इस पर नगर निगम प्रशासन और संबंधित एटीपी  जोन-C  का स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।

पीला पंजा किसके लिए? सवाल नगर निगम से

गरीब की छोटी दुकान या कुछ ईंटों पर तत्काल कार्रवाई और दूसरी ओर कुछ निर्माणों को लेकर कथित नरमी—अगर ऐसी स्थिति है तो यह सिर्फ एक बिल्डिंग का मामला नहीं, बल्कि नगर निगम की कार्रवाई की समानता पर बड़ा सवाल है।अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस मामले में रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति साफ करता है या फिर मामला फाइलों में ही घूमता रहेगा।

‘जीत समाचार’ जल्द ही उपलब्ध दस्तावेज सामने रखकर इस मामले की अगली कड़ी प्रकाशित करेगा।

दैनिक विज्ञापन
दैनिक विज्ञापन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed