विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी, तभी मजबूत रहेगा लोकतंत्र: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026  जीत समाचार

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग और व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि विकास का लाभ व्यापक रूप से लोगों तक नहीं पहुंचेगा तो विशेष रूप से युवाओं का लोकतंत्र में विश्वास प्रभावित हो सकता है।

उपराष्ट्रपति शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर अपने विचार रख रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास का लाभ देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग तक पहुंचे। उनके अनुसार आर्थिक मजबूती को सामाजिक मजबूती से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा लोकतंत्र की मजबूती का आधार

राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा आवश्यक है। उन्होंने निर्णय लेने में आम सहमति के महत्व पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों पर चर्चा के बाद ऐसा निष्कर्ष सामने आना चाहिए जिसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जा सके। बदलते वैश्विक माहौल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हो रहे बदलावों के बीच उन्होंने नीति निर्माताओं को जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखने की सलाह दी।

समावेशी विकास पर जोर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने, काम करने, कानूनी तरीके से कमाने और अपनी इच्छा के अनुसार धन खर्च करने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने यह दिखाया है कि लोकतंत्र और आर्थिक विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।उन्होंने वित्तीय समावेशन और पारदर्शिता के क्षेत्र में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), GST तथा जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) व्यवस्था की भूमिका का भी उल्लेख किया।राधाकृष्णन के अनुसार अगस्त 2026 तक देश में 59 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं, जबकि GST पंजीकरण की संख्या 2017 में लगभग 66.5 लाख से बढ़कर मई 2026 में करीब 1.65 करोड़ हो गई।

उन्होंने नीति निर्माण में लचीलापन बनाए रखने और जमीनी तथ्यों के आधार पर नीतियों को लगातार बेहतर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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