STP सुरिंदर सिंह बिंद्रा की प्रमोशन हाईकोर्ट में चुनौती, शैक्षणिक योग्यता पर उठे गंभीर सवाल
चंडीगढ़। लुधियाना | 4 अक्टूबर 2026 | जीत समाचार
नगर निगम से जुड़े चर्चित अधिकारी सुरिंदर सिंह बिंद्रा की सीनियर टाउन प्लानर (STP) पद पर प्रमोशन एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जालंधर के आरटीआई एक्टिविस्ट करणप्रीत सिंह की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब सरकार के 25 अगस्त 2026 के प्रमोशन आदेश को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से प्रमोशन आदेश पर रोक लगाने तथा अंतिम फैसला आने तक इसे स्थगित रखने की मांग की है। याचिका में बिंद्रा की नियुक्ति, शैक्षणिक योग्यता और प्रमोशन के लिए निर्धारित पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
डिप्लोमा की मान्यता को लेकर सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि सुरिंदर सिंह बिंद्रा वर्ष 1999 में इंस्पेक्टर (जनरल) के पद पर नियुक्त हुए थे और उस समय उनकी योग्यता एमए (पॉलिटिकल साइंस) बताई गई थी। इसके बाद वर्ष 2003 में उनके द्वारा सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा हासिल किए जाने का उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता ने इस डिप्लोमा की मान्यता और अवधि को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि संबंधित संस्थान की एआईसीटीई मान्यता तथा एक वर्षीय डिप्लोमा को निर्धारित तीन वर्षीय डिप्लोमा के समकक्ष मानने का मुद्दा स्पष्ट नहीं है।
पुराने शो-कॉज नोटिस का भी हवाला
याचिका में वर्ष 2017 में स्थानीय निकाय विभाग द्वारा बिंद्रा को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उस समय भी उनकी योग्यता और प्रमोशन से जुड़े सवाल विभाग के सामने उठे थे।
इसके अलावा याचिका में 29 सितंबर 2025 के हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से हासिल इंजीनियरिंग डिप्लोमा की मान्यता से जुड़े मुद्दे को भी प्रमोशन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया है।
प्रमोशन के साथ एफआईआर का भी उल्लेख
याचिका में अगस्त 2026 में लुधियाना के सराभा नगर थाने में बिंद्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर का भी उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय अदालत के समक्ष विचाराधीन है।
सरकार का आदेश भी अदालत के फैसले के अधीन
गौरतलब है कि पंजाब सरकार के 25 अगस्त 2026 के प्रमोशन आदेश में यह प्रावधान किया गया है कि प्रमोशन संबंधित अदालतों में लंबित मामलों के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। नई सीनियरिटी का लाभ भी अंतिम न्यायिक निर्णय के बाद ही मिलने की बात कही गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाईकोर्ट इस प्रमोशन और याचिका में उठाए गए शैक्षणिक योग्यता से जुड़े सवालों पर क्या रुख अपनाता है। मामले की अगली कार्रवाई पर नगर निगम और स्थानीय निकाय विभाग की भी नजर रहेगी।
जीत समाचार की ओर से सुरिंदर सिंह बिंद्रा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

