सील पर सवाल, सील खुली तो राज़ भी खुलेंगे!
दो साल के करीब शिकायत ठंडे बस्ते में, कमर्शियल बिल्डिंग कैसे हो गई ‘आजाद’? न आदेश मिला, न फीस का हिसाब!
लुधियाना | 4 अक्टूबर 2026 विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला ऐसी कमर्शियल बिल्डिंग का है, जिसे शिकायत के बाद नगर निगम ने सील किया था, लेकिन अब कथित तौर पर वही सील खुल चुकी है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत को दो साल से ज्यादा समय गुजर चुका है, मगर न शिकायत का अंतिम निपटारा हुआ और न ही यह साफ हो पाया कि आखिर सील खोलने का आदेश किसने दिया!
सील लगी थी निगम की, खुली किसके इशारे पर?
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब नगर निगम ने बिल्डिंग को सील किया था तो सील खुली कैसे?
क्या सील खोलने का बाकायदा आदेश जारी हुआ था?
अगर आदेश हुआ तो वह रिकॉर्ड में कहां है?
अगर आदेश नहीं हुआ तो सील किसने खोली?
और अगर सील तोड़ी गई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों के जवाब अब निगम की जांच रिपोर्ट से ही सामने आने हैं।
सरकारी खजाने का हिसाब कौन देगा?
मामला सिर्फ सील खुलने तक सीमित नहीं है। असली सवाल तो नगर निगम के राजस्व का है।
अगर बिल्डिंग निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ था और कंपाउंडिंग फीस या अन्य शुल्क बनता था, तो सरकारी खजाने में कितनी रकम जमा हुई?
लाखों रुपये की फीस बनती थी तो क्या पूरी रकम जमा हुई?
क्या बिल्डिंग को नियमानुसार कंपाउंड किया गया?
क्या नक्शे के मुताबिक निर्माण हुआ?
या फिर सील खुल गई और सरकारी राजस्व का हिसाब फाइलों में ही उलझा रह गया?
‘ईमानदारी’ के बड़े दावे, लेकिन अपने इलाके में सवाल!
दिलचस्प बात यह है कि सरकार के राजस्व को नुकसान न पहुंचने देने और कानून का पालन करवाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन इसी मामले में आरोप लग रहे हैं कि सरकारी खजाने को मिलने वाली रकम का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है।
अगर नियमों के मुताबिक फीस बनती थी और वह जमा नहीं हुई, तो सवाल उठना लाजिमी है कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
राजनीतिक दबाव की चर्चा—सच क्या है?
इलाके में यह चर्चा भी है कि बिल्डिंग की सील खुलवाने में राजनीतिक दबाव की भूमिका हो सकती है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन अगर ऐसा कोई दबाव था तो जांच में उसका भी खुलासा होना चाहिए।
क्योंकि कानून अगर आम आदमी के लिए सख्त है तो रुतबे और राजनीतिक पहुंच के आधार पर किसी को राहत क्यों मिले?
जोन-सी में पहुंची शिकायत, अब खुलेगा ‘सील का राज’?
मामला अब जोन-सी तक पहुंच चुका है। ऐसे में निगाहें नगर निगम की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
जीत समाचार जल्द ही इस मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर यह सामने लाएगा कि—
सील किस आदेश से लगी?
किस आदेश से खुली?
किसने खुलवाई?
कंपाउंडिंग फीस कितनी बनी?
सरकारी खजाने में कितनी जमा हुई?
और अगर रकम जमा नहीं हुई तो नुकसान किसके खाते में जाएगा?
आखिरी सवाल—नियमों की सील बड़ी या रसूख की चाबी?
अब गेंद नगर निगम के पाले में है। दो साल से ज्यादा पुरानी शिकायत, सील की स्थिति और सरकारी राजस्व—तीनों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।
क्योंकि अगर घर का ही कोई हिस्सा सरकारी खजाने में सेंध लगाने लगे, तो फिर सवाल सिर्फ एक बिल्डिंग का नहीं रहता—पूरी व्यवस्था की ईमानदारी पर खड़ा हो जाता है।
जीत समाचार की अगली रिपोर्ट में—दस्तावेजों के साथ बड़ा खुलासा। 5 अक्टूबर 2026 सोमवारवर्ष 14 ZEETSAMACHAR0@GMAIL.COM

