जोन सी ब्लॉक-37 में ‘चारदीवारी’ का खेल या कमर्शियल निर्माण की तैयारी?
एटीपी जोन सी बोले—काम रुकवा दिया, मौके की तस्वीरें कुछ और कहानी बता रहीं! इंटरलॉकिंग टाइलें फिर कैसे लगने लगीं?
लुधियाना | 05 अक्टूबर 2026 विक्की कुमार
लुधियाना नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच के जोन-C, ब्लॉक-37 में चल रहे निर्माण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 1500 गज जमीन को लेकर पहले चारदीवारी करने की बात निगम को लिखकर देने का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति अब इस दावे से अलग नजर आने का आरोप लगाया जा रहा है।
पहले चारदीवारी के नाम पर काम शुरू हुआ, फिर मौके पर बजरी बिछी और अब इंटरलॉकिंग टाइलें लगाने का काम शुरू होने की बात सामने आ रही है।
एटीपी जोन सी बोले—काम बंद, फिर इंटरलॉकिंग कैसे शुरू?
मामले में एटीपी जोन सी से बात किए जाने पर उनका कहना है कि काम बंद करवा दिया गया है। इसके समर्थन में उनके द्वारा काम रुका हुआ दिखाने वाली तस्वीरें भी भेजी गईं।लेकिन जीत समाचार की मौके पर की गई रिकॉर्डिंग में स्थिति अलग दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यही सबसे बड़ा सवाल है—अगर काम वास्तव में बंद करवा दिया गया था, तो इंटरलॉकिंग टाइलें लगाने का काम दोबारा कैसे शुरू हो गया?
1 क्या मौके पर निगम की टीम दोबारा गई?
2 क्या निर्माणकर्ता को लिखित रूप से काम बंद रखने के आदेश दिए गए?
3 और अगर आदेश के बावजूद काम जारी है तो जिम्मेदारी किसकी बनती है?
चारदीवारी कहां गई?
मामले का सबसे बड़ा सवाल कथित तौर पर वही चारदीवारी है, जिसका जिक्र निगम को दिए गए दस्तावेजों में किया गया था।
करीब 1500 गज क्षेत्र में चारदीवारी करने की बात कही गई थी, लेकिन मौके पर अब इंटरलॉकिंग और व्यावसायिक गतिविधि की तैयारी जैसे हालात दिखाई देने के आरोप हैं।अब सवाल है कि—जिस चारदीवारी के आधार पर निगम को जानकारी दी गई थी, वह मौके पर कहां है?अगर चारदीवारी का उद्देश्य सिर्फ निर्माण को आगे बढ़ाने का रास्ता बनाना था, तो निगम को इसका जवाब रिकॉर्ड के आधार पर देना चाहिए।
22–23 लाख की दुकानों की चर्चा!
इलाके में चर्चा है कि यहां तैयार होने वाली दुकानों को कथित तौर पर 22 से 23 लाख रुपये के आसपास बेचने की बात चल रही है। हालांकि इन कीमतों और बिक्री के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।अगर जमीन पर कमर्शियल निर्माण किया जा रहा है तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या नगर निगम से आवश्यक अनुमति, स्वीकृत नक्शा और अन्य नियमानुसार मंजूरियां ली गई हैं?
निगम को खुद लिखकर दिया था—अब जवाब कौन देगा?
मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि यदि संबंधित पक्ष ने निगम को लिखित रूप से 1500 गज क्षेत्र में चारदीवारी करने की बात कही थी, तो उस दस्तावेज और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान क्यों नहीं किया जा रहा?पहले बिल्डिंग इंस्पेक्टर की भूमिका पर सवाल उठे और अब ATP के काम रुकवाने के दावे के बावजूद मौके पर काम आगे बढ़ने की बात सामने आ रही है।इससे सवाल और बड़ा हो जाता है
आखिर ब्लॉक-37 में किसके आदेश चल रहे हैं—निगम के या मौके पर काम करवाने वालों के?”
जीत समाचार किसी अधिकारी या व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहा। मामले की वास्तविक जिम्मेदारी दस्तावेज, मौके की जांच और नगर निगम की आधिकारिक रिपोर्ट से ही तय होनी चाहिए।
अब निगाहें नगर निगम के उच्च अधिकारियों पर हैं कि वे 1500 गज की जमीन, चारदीवारी, इंटरलॉकिंग कार्य, स्वीकृत नक्शे और कथित कमर्शियल निर्माण की पूरी जांच करवाते हैं या नहीं।
जीत समाचार इस मामले में दस्तावेजों और मौके की तस्वीरों के आधार पर आगे की रिपोर्ट भी सामने लाएगा।

