लुधियाना नगर निगम में फिर पड़ा ‘तबादला बम’!

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दिवाली से पहले निकला ‘बंपर’—अब देखना होगा बंपर पास होता है या फेल?

लुधियाना।, 10 अक्तूबर:विक्की कुमार 

नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच में एक बार फिर अधिकारियों के तबादलों से हलचल मच गई है। दिवाली से पहले हुए इन तबादलों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या केवल एटीपी स्तर पर अधिकारियों की सीट बदलने से बिल्डिंग ब्रांच में कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लग पाएगी, या फिर “मसाला वहीं का वहीं” रहेगा?

जानकारी के मुताबिक, जोन-सी के एटीपी को हेडक्वार्टर भेजा गया है, जबकि हेडक्वार्टर में तैनात एटीपी को जोन-सी में लगाया गया है। इसी तरह एटीपी स्तर पर अन्य जोनों में भी जिम्मेदारियों में बदलाव के आदेश सामने आए हैं। इन तबादलों के बाद अब असली परीक्षा नगर निगम प्रशासन की होगी कि क्या इससे जमीनी स्तर पर व्यवस्था में कोई बदलाव आता है।

अफसर बदले, लेकिन बिल्डिंग इंस्पेक्टरों पर सवाल बरकरार!

सबसे बड़ा सवाल बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की तैनाती को लेकर खड़ा हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में जिन कर्मचारियों/अधिकारियों के खिलाफ हेडक्वार्टर स्तर पर रिपोर्ट भेजे जाने की बात सामने आई है, उनमें से कुछ अभी भी पब्लिक डीलिंग में तैनात बताए जा रहे हैं।ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर शिकायत या जांच की सिफारिश की गई है, तो जांच पूरी होने तक उसे उसी तरह की संवेदनशील ड्यूटी पर रखने का आधार क्या है?क्या स्टाफ की कमी के नाम पर नियमों से समझौता किया जा रहा है?

सरकारी खजाने को नुकसान का आरोप—फिर कार्रवाई कब?

बिल्डिंग ब्रांच में अवैध या नियमों के विपरीत निर्माणों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में यदि किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है और उसके खिलाफ रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाती है, तो उसके बाद विभागीय कार्रवाई होना भी जरूरी माना जाता है।अब सवाल यह है कि जिस मामले में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई गई है, उसमें जिम्मेदारी तय कब होगी?

सेवादारों की भूमिका पर भी उठे सवाल

बिल्डिंग ब्रांच में तैनात कुछ सेवादारों की कथित फील्ड भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ सेवादार फील्ड में जाकर खुद को इंस्पेक्टर के रूप में पेश करते हैं और कई बिल्डिंग मामलों में लोगों से संपर्क करते हैं।यदि ये आरोप सही हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय है। आखिर किसी सेवादार को फील्ड में जाकर बिल्डिंग इंस्पेक्टर जैसी भूमिका निभाने की अनुमति किस स्तर से मिल रही है?

कमिश्नर साहब से मांग—पूरे सिस्टम की समीक्षा हो

नगर निगम कमिश्नर से मांग है कि केवल एटीपी के तबादलों तक सीमित न रहते हुए बिल्डिंग इंस्पेक्टरों और फील्ड में सक्रिय सेवादारों की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाए।यदि किसी कर्मचारी की तैनाती को लेकर शिकायतें या जांच लंबित हैं, तो उसकी पब्लिक डीलिंग की जिम्मेदारी पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए। साथ ही जरूरत पड़ने पर सेवादारों की भी रोटेशन के आधार पर तैनाती की जाए, ताकि किसी एक क्षेत्र में लंबे समय तक रहने से बनने वाली कथित सांठगांठ की संभावना को कम किया जा सके।

अब असली सवाल—तबादला या समाधान?

तबादले के आदेश जारी हो गए हैं, लेकिन असली सवाल अभी बाकी है—

1 क्या सिर्फ कुर्सियां बदलने से बिल्डिंग ब्रांच की व्यवस्था बदलेगी?

2 क्या बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की भूमिका की भी जांच होगी?

3 क्या फील्ड में सक्रिय सेवादारों पर भी कार्रवाई होगी?

4 और सबसे बड़ा सवाल—सरकारी खजाने को हुए कथित नुकसान की जिम्मेदारी आखिर तय कब होगी?

अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन का यह “दिवाली बंपर” व्यवस्था सुधारने में पास होता है या फिर फेल!

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