नगर निगम की ‘रीढ़ की हड्डी’ पर चोट! बिल्डिंग ब्रांच के कर्मचारी पर गंभीर सवाल, कार्रवाई की जगह पब्लिक डीलिंग क्यों?
सरकारी खजाने को कथित नुकसान के आरोपों के बावजूद मेहरबानी? तबादला हुआ या ‘सजा’ के नाम पर नई तैनाती का तोहफा?
लुधियाना | 06 अक्टूबर 2026 शर्मा
लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभाग में तैनात कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें और सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें और कथित सबूत उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुके हैं, उन्हें कार्रवाई के दायरे में लाने की बजाय पब्लिक डीलिंग में क्यों रखा गया है?मामला इसलिए भी गंभीर बताया जा रहा है क्योंकि आरोप सरकारी खजाने के संभावित नुकसान, लंबित चालानों और बिल्डिंग मामलों में कथित लापरवाही से जुड़े हैं।
कार्रवाई की उम्मीद थी, मिला तबादला?
सूत्रों के अनुसार, जिस कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसे मुख्यालय में लगाने या जांच पूरी होने तक पब्लिक डीलिंग से हटाने की बजाय दूसरे जोन में तैनाती दिए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब सवाल सीधा है—
1 अगर कर्मचारी पर आरोप गंभीर हैं तो जांच कहां है?
2 अगर आरोप गलत हैं तो क्लीन चिट कहां है?
3 और अगर जांच लंबित है तो पब्लिक डीलिंग में तैनाती क्यों?
चालानों के नाम पर सरकारी राजस्व का खेल?
बिल्डिंग ब्रांच में चालानों, अवैध निर्माणों और सरकारी राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब यह जांच का विषय है कि कितने चालान लंबित पड़े हैं और इनके कारण सरकारी खजाने को कितना राजस्व प्राप्त नहीं हुआ।अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही से सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
दो अधिकारियों के खिलाफ मामला ऊपर गया—एक पर कार्रवाई, दूसरे पर सवालिया निशान!
जानकारी के मुताबिक पहले दो अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत या रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजे जाने की बात सामने आई थी। इनमें से एक के खिलाफ कार्रवाई हुई, जबकि दूसरे मामले में कार्रवाई को लेकर सवाल अभी भी कायम हैं।अगर दोनों मामलों में शिकायतें गंभीर थीं तो कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों?क्या विभागीय नियम सभी कर्मचारियों के लिए बराबर हैं या फिर किसी को प्रभाव और सिफारिश का फायदा मिल रहा है? इसका जवाब अब नगर निगम के उच्च अधिकारियों को देना चाहिए।
‘सजा’ के बजाय नई पोस्टिंग क्यों?
नगर निगम में चर्चा यह भी है कि जिस कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे, उसे मुख्यालय भेजने की बजाय दूसरे जोन में भेज दिया गया।ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह प्रशासनिक कार्रवाई है या फिर कार्रवाई के नाम पर ऐसी पोस्टिंग, जिससे मामला कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में चला जाए?
जीत समाचार के पास और भी दस्तावेज होने का दावा
जीत समाचार को मिली जानकारी के अनुसार बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अन्य दस्तावेज और मामले भी सामने आए हैं। इनकी पड़ताल की जा रही है।इन दस्तावेजों में कथित रूप से सरकारी राजस्व, लंबित चालान, बिल्डिंग निर्माण और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े मामले शामिल हैं।इन सभी तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करना विभागीय जांच का विषय है।
अब कमिश्नर के सामने चार बड़े सवाल
1. गंभीर शिकायतों वाले कर्मचारी को पब्लिक डीलिंग में क्यों रखा गया?
2. लंबित चालानों से सरकारी राजस्व के नुकसान का हिसाब कौन देगा?
3. दो मामलों में कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग क्यों रहा?
4. अगर सरकारी खजाने को नुकसान साबित होता है तो जिम्मेदारी तय कर रिकवरी होगी या नहीं?
अगली कड़ी में सामने आएंगे और तथ्य!
नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच को सरकारी राजस्व की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में यदि इसी शाखा के कर्मचारियों पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते हैं तो मामला सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
जीत समाचार इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल जारी रखेगा। जो भी तथ्य दस्तावेजों से पुष्ट होंगे, उन्हें अगली कड़ी में सामने लाया जाएगा।
अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों के ‘ठंडे बस्ते’ में चला जाता है।

