खबर के बाद भी बिल्डिंग तैयार!” | जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच का नया रिकॉर्ड? | ढाई मंजिल खड़ी, चालान कागजों में
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शिकायत के एक महीने बाद भी निर्माण जारी रहने का दावा | नक्शा, कंपाउंडिंग फीस और चालान के रिकॉर्ड पर बड़े सवाल
लुधियाना, 29 जुलाई।जीत समाचार ब्यूरो
लुधियाना नगर निगम के जोन-सी बिल्डिंग ब्रांच को लेकर जीत समाचार की लगातार पड़ताल के बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है। जिस बिल्डिंग को लेकर पहले शिकायत की गई थी, उस पर खबर प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण रुकने के बजाय ढाई मंजिल तक पहुंच जाने का दावा किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी, तस्वीरों और बातचीत के आधार पर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर बिल्डिंग को लेकर शिकायत पहले ही अधिकारियों तक पहुंच चुकी थी, तो निर्माण इतना आगे कैसे बढ़ गया ?
खबर के बाद भी निर्माण बढ़ता गया?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित बिल्डिंग के निर्माण को लेकर पहले ही नगर निगम अधिकारियों को जानकारी दी गई थी। निर्माण के दौरान कथित तौर पर नोटिस/चालान की कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद निर्माण डेढ़
मंजिल से बढ़कर ढाई मंजिल तक पहुंच गया।यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि निर्माण हुआ—बल्कि सवाल यह भी है कि निर्माण होते समय संबंधित विभाग की निगरानी कहां थी?
चालान का बहाना, लेकिन निर्माण जारी?
शिकायतकर्ता के अनुसार अधिकारियों की ओर से कार्रवाई के नाम पर चालान काटे जाने की बात कही गई। लेकिन इसके साथ ही कई सवाल अनुत्तरित हैं।
अगर चालान काटा गया था तो—
1 चालान की कुल संख्या कितनी थी?
2 प्रत्येक चालान में कितनी राशि निर्धारित की गई?
3 क्या राशि वास्तव में जमा हुई या नहीं?
4 संबंधित बिल्डिंग की कंपाउंडिंग फीस कितनी बनी?
5 क्या बिल्डिंग का मंजूरशुदा नक्शा मौजूद है?
6 अगर नक्शा मंजूर नहीं था तो निर्माण आगे कैसे बढ़ा?
यही वे सवाल हैं जिनका स्पष्ट रिकॉर्ड जनता के सामने आना अभी बाकी है।
एक-एक मंजिल बढ़ती रही, नोटिस के बावजूद निर्माण ?
शिकायतकर्ता का दावा है कि जब बिल्डिंग एक-एक मंजिल करके तैयार हो रही थी, तब संबंधित कर्मचारियों को इसकी जानकारी थी और नोटिस/चालान की कार्रवाई भी की गई थी।
इसके बावजूद निर्माण डेढ़ से ढाई मंजिल तक पहुंच गया। अब सवाल यह है कि यदि विभाग को निर्माण की जानकारी थी, तो सिर्फ कागजी कार्रवाई तक मामला सीमित क्यों रहा? क्या मौके पर जाकर निर्माण रोकने, सील करने या अन्य नियमानुसार कार्रवाई की गई थी?
WhatsApp पर भी भेजी गईं तस्वीरें—फिर कार्रवाई कहां ?
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार निर्माण की तस्वीरें बिल्डिंग इंस्पेक्टर और एटीपी, जोन-सी के WhatsApp पर भी भेजी गई थीं।
अगर यह दावा सही है और अधिकारियों तक निर्माण की तस्वीरें पहुंची थीं, तो अब सवाल उठना स्वाभाविक है—
1 तस्वीरें मिलने के बाद मौके पर कौन गया?
2 क्या निरीक्षण रिपोर्ट तैयार हुई?
3 क्या निर्माण रोकने का आदेश हुआ?
4 अगर कार्रवाई हुई तो उसका रिकॉर्ड कहां है?
पैसे जमा हुए?”—जवाब मिला, “चालान काट दिया है
शिकायतकर्ता के अनुसार जब संबंधित कर्मचारियों से पूछा गया कि पैसे जमा हुए या नहीं, तो जवाब मिला कि “चालान काट दिया गया है।
लेकिन जब आगे सवाल किया गया कि कितना जुर्माना है, कितनी रकम जमा हुई और नक्शा कहां है?, तो कथित तौर पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है।
जनता के लिए सवाल—चालान की पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं ?
यदि चालान काटा गया है तो उसकी संख्या, तारीख, राशि और भुगतान की स्थिति रिकॉर्ड में होनी चाहिए।
तो फिर सवाल सीधा है—चालान की पूरी जानकारी जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही ?
नए कमिश्नर को खुश करने के लिए चालान?”—सूत्रों के दावे की भी जांच जरूरी
मामले में कुछ सूत्रों की ओर से यह दावा भी सामने आया है कि चालान की कार्रवाई को नए कमिश्नर के सामने विभागीय कार्रवाई के तौर पर पेश किया गया हो सकता है। हालांकि जीत समाचार इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
अगर ऐसा कोई दावा किया जा रहा है तो इसकी सच्चाई रिकॉर्ड से ही सामने आ सकती है।इसलिए जरूरी है कि नगर निगम यह स्पष्ट करे कि—
1 किस तारीख को चालान हुआ?
2 किस अधिकारी ने किया?
3 कितनी राशि
4 कितनी राशि जमा हुई?और उसके बाद निर्माण रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई ?
पीसीएस अधिकारी ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया
इस मामले पर बिल्डिंग ब्रांच से जुड़े पीसीएसअधिकारी ने कहा: हमारे पास शिकायत आई हुई है। हम कल सुबह इसका चेक करवाएंगे कि नक्शे के मुताबिक बिल्डिंग बनी है या नहीं। जो बनती कार्रवाई होगी वो होगी। दोषी कर्मचारी पर
कानूनी कार्रवाई होगी।”पीसीएस अधिकारी के इस बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि मौके की जांच में क्या सामने आता है और नगर निगम आगे क्या कार्रवाई करता है।
एमटीपी से संपर्क की कोशिश
मामले में नगर निगम के एमटीपी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन खबर तैयार होने तक उनके फोन पर संपर्क नहीं हो सका। यदि एमटीपी कार्यालय या संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक
प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी जीत समाचार की अगली रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
जीत समाचार के 10 बड़े सवाल
1. संबंधित बिल्डिंग का मंजूर नक्शा है या नहीं?
2. अगर नक्शा मंजूर नहीं है तो निर्माण ढाई मंजिल तक कैसे पहुंचा?
3. अब तक कितने चालान काटे गए?
4. प्रत्येक चालान में कितनी राशि निर्धारित की गई?
5. कंपाउंडिंग फीस कितनी बनती है?
6. क्या कंपाउंडिंग फीस वास्तव में जमा हुई?
7. WhatsApp पर तस्वीरें भेजे जाने के बाद मौके पर निरीक्षण हुआ या नहीं?
8. अगर निरीक्षण हुआ तो रिपोर्ट कहां है?
9. शिकायत के बाद निर्माण रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
10. अगर विभागीय नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्रवाई कब होगी?
अब बिल्डिंग का डेटा होगा सार्वजनिक
जीत समाचार अब इस मामले में सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रहेगा। उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायत, तस्वीरों और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर बिल्डिंग से जुड़े डेटा को जनता के सामने
जनता जानना चाहती है—
क्या बिल्डिंग नियमों के मुताबिक बनी है?
क्या नक्शा मंजूर है?
क्या कंपाउंडिंग फीस जमा हुई?
चालान की कार्रवाई के बाद भी निर्माण कैसे आगे बढ़ा?
और सबसे बड़ा सवाल—
अगर शिकायत पहले ही पहुंच गई थी, तो ढाई मंजिल बनने तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जोन-सी को लेकर जीत समाचार की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज और रिकॉर्ड जो भी कहानी बताएंगे, उसे जनता के सामने रखा जाएगा।
