दो घंटे की बारिश में डूबा लुधियाना | मानसून तैयारियों की खुली पोल, शहर बना जलभराव और कूड़े का अड्डा
Views: 8
बुड्ढ़े दरिया का पानी कई इलाकों में घुसा, डिस्पोजल समय पर न चलने से बढ़ी परेशानी | डीसी और निगम कमिश्नर की रिहायश के बाहर भी भरा पानी
लुधियाना, 30 जुलाई (जीत समाचार)
मानसून की पहली जोरदार दो घंटे की बारिश ने लुधियाना नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी। शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए, जबकि जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और जाम नालियों ने हालात को और गंभीर बना दिया। बुड्ढ़े दरिया का पानी एक बार फिर ढोका मोहल्ला, कश्मीर नगर और न्यू शिवाजी नगर की गलियों तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि नगर निगम के कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण सुबह तेज बारिश के दौरान कई डिस्पोजल समय पर चालू नहीं हो सके। वहीं सड़कों और गलियों में फैले कचरे के कारण रोड जालियां (ड्रेनेज ग्रिल) बंद हो गईं, जिससे पानी की निकासी बाधित रही और शहर के कई हिस्सों में घंटों जलभराव बना रहा।
स्थिति गंभीर होने पर कई इलाका पार्षद स्वयं मौके पर पहुंचे और डिस्पोजल मोटरें चालू करवाकर पानी की निकासी शुरू करवाई। कुछ घंटों बाद पानी तो उतर गया, लेकिन सड़कों पर फैले कूड़े के ढेर और बदबू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया। मुख्य सड़कों पर जलभराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा और लोग घंटों फंसे रहे।
चंदर नगर में लाखों की परियोजना भी रही बेअसर
चंदर नगर क्षेत्र में वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए लाखों रुपये की लागत से नई सीवरेज पाइप लाइन बिछाई गई थी। इसके बावजूद बारिश के बाद बुड्ढ़े दरिया का गंदा और बदबूदार पानी सड़कों पर जमा हो गया। स्कूली बच्चों, दोपहिया चालकों और राहगीरों को इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा।
डीसी और निगम कमिश्नर की रिहायश के बाहर भी भरा पानी
बारिश का असर इतना व्यापक रहा कि लुधियाना के उपायुक्त (डीसी) और नगर निगम कमिश्नर की सरकारी रिहायश के बाहर भी जलभराव देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारियों के सरकारी आवासों के बाहर ही पानी निकासी की समस्या बनी हुई है, तो शहर के अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
इस संबंध में बीएंडआर शाखा के एससी शाम लाल गुप्ता ने बताया कि डीसी निवास के बाहर से निगम के स्विमिंग पूल तक सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है।
जनरेटर बंद होने से बढ़ी परेशानी
पार्षद अरुण शर्मा ने बताया कि भारी बारिश के दौरान डिस्पोजल का जनरेटर बंद होने से शहर की कई सड़कों पर पानी भर गया। सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे, जनरेटर चालू करवाया और पानी की निकासी शुरू करवाई। इसके बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए और यातायात बहाल हो सका।
पहली बार टूटिया वाले मंदिर में घुसा बारिश का पानी
टूटिया वाला मंदिर रोड पर जलभराव रोकने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा नई स्टॉर्म सीवर लाइन बिछाई गई थी। इसके बावजूद इस बार पहली बार मंदिर परिसर के अंदर तक बारिश का पानी पहुंच गया।
भाजपा नेता दीपू शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले लगभग 92 लाख रुपये और बाद में करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्टॉर्म सीवर परियोजनाओं पर खर्च किया गया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। उनका आरोप है कि पहले से मौजूद व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय नई पाइप लाइन डाल दी गई, जिसके बावजूद मंदिर में पानी भर गया।
जब इस संबंध में संबंधित एक्सईएन से पूछा गया तो उन्होंने इसे “पहला ट्रायल” बताया। इस टिप्पणी के बाद स्थानीय लोगों ने परियोजना की कार्यप्रणाली और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।
लोगों का सवाल
लगातार करोड़ों रुपये की परियोजनाओं, मानसून तैयारियों और सफाई अभियानों के दावों के बावजूद यदि पहली ही तेज बारिश में शहर जलमग्न हो जाए, तो यह स्वाभाविक रूप से नगर निगम की तैयारियों और जल निकासी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। नागरिक अब स्थायी समाधान और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
